स्वामी (हिंदी कविता)

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स्वामी (हिंदी कविता)

क्या तलाश है तुम्हें किसी स्वामी की

पर क्यों , तुम भी तो स्वामी हो –

अपने घर के अपने व्यवसाय के

तुम्हे किसी और स्वामी को खोजना नही

बल्कि स्वयं अपनी साधना से स्वामी बनना है

और खोजना है तुम्हें अपना”रामकृष्ण परमहंस”

वह भी नरेंद्र हो कर फिर बनोगे तुम स्वामी विवेकानन्द

नवीन संरचना के साथ नवीन परिधानों में

एक नही हजारो भटक रहें हैं लाखो भटक भी गये हैं

अपने बिम्ब को प्रतिबिम्ब को पहचानो

क्यों आए और क्या क्या पाए इस धरा पर

पावन पूण्य यह धरती आज भी है

इसपर बसे मानव हीं इसे नक्कारते हैं

तुम छोडो इन बातो को तुम भी नरेंद्र हो

पहचानो अपने आपको यह साधना कोई

एक दो बर्षीय नही बल्कि जीवन समूल

इसी खोज में समर्पित करो होम करो जीवन

तब तुम्हारा राम कृष्ण परमहंस मिलेगा

ये तीन हैं या एक तुम अपनी खोज में बताना |

रमेश यायावर , बनमनखी ! 27-12-2015

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