मेरे पिता (हिन्दी कविता)

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मेरे पिता (हिन्दी कविता)

स्मृतिशेष : मेरे पिता गोपी राम अग्रवाल

मन पूछता है, मेरे यादों के हिस्से के

मेरे पिता ! क्या मुझे भी उसी तरह

याद करते ,मेरी हीं तरह कोई फरियाद करते

बातों में, घर के कामो में दिनभर वे याद आते |

यही तो जीवन है , मौतों के बाद

गीले शिकवे भी मन याद करता

रुक रुक कर आँखें भरता

संसाधनो के अनुरूप अवश्य किया |

कुदरत ने जितना दिया

कोताही कभी नही बरती

गवाह बनी धर्म और धरती

कैसे दमके ये अब भाल ?

देखें प्रभु महाकाल !

पितृ गणों की अब ये बारी

देखूं कैसी की है तैयारी

जा रहा है उनका लाल देखें प्रभु महाकाल !

पूजन में जब तीन पिंड बनाया

अपने पिता को उनके पिता ,पितामह ,प्रपितामह से मिलवाया

इस पूजन के हैं अपने सच कोई कहानी अब तो रच

परमात्मा ! मेरे पिता को असीम शांति सदा शांति देता रहे !!

रमेश अग्रवाल /रमेश यायावर

बनमनखी (पुर्णिया) बिहार 22/11/2015

 

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