बोलती सरहद

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बोलती सरहद
सरहदे बोलती भी हैं
अपना प्यारा मुँह खोलती भी हैं
,आएँ, इसमें घुस जाएँ
भारत माता को अब ना सताएं |
दर दर भटके माँ की पीड़ा
इन बिन सब ब्रत, अधुरा
यूँ भी जिन्दगी राख बनेगी
भारतीयों में तेरी साख बनेगी
आए मिलकर जीते जंग
देखे कहाँ ,कैसे दुश्मन संग ?
हर घर से सबको लड़ना होगा
दुश्मन को हमसे डरना होगा
चोरी छिपे घुस पैठ बढी
दुश्मन की नजरे हमपर चढी
आओ मिलकर मार भगाएं
फिर प्यारा नव बर्ष मनाएं |
रमेश यायावर 01-01-15

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