बच्चे की समझ (लघु कहानी)

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बच्चे की समझ (लघु कहानी)
आज 2015 नवबर्ष की शुरुआत है | मै अपने कमरे में रजाई ओढकर बैठा भगवान के भजनों को सुन रहा था| आजकल मेरी यही से दिनचर्या शुरू होती है | पहले एक घंटे भजन सुनना फिर समाचार सुनना फिर स्नान आदि नास्ता कर फिर प्रतिष्ठान आदि गमन | इसी बीच मेरे छोटे भाई के बेटे गणेश ने मेरे कमरे में चुपचाप कदम रखा और मुझे नवबर्ष पर प्रणाम किया | मैंने रजाई से हाथ बाहर निकला नये साल की शुरुआत हुई है बच्चे को आशीर्वाद दूँ , इससे पहले हीं नटखट बच्चा गायब | मैंने आवाज लगाई आशीर्वाद तो लेते जाओ , बच्चा बोला नही, अभी बहुतो को प्रणाम करना है | फिर घंटे भर बाद जब मै कमरे से बाहर निकला और परिजनों से बताया तब सबको बच्चे की समझ पर हंसी आ गई | फिर बच्चे से घर वालो ने कहा ताऊ जी से आशीर्वाद नही लेगा क्या ? बच्चे का जबाब नही हमको मॉल (रुपया) लेना है |
नवबर्ष की नई शुरुआत के साथ हीं मित्रो ,परिचितों ,शुभचिंतको रिश्तेदारों और अच्छे लोगो को नवबर्ष पर बडो को प्रणाम और छोटो को प्यार आशीर्वाद | रमेश यायावर – रमेश अग्रवाल ०१-०१-२०१५

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