आग

मानक

आग
अब आग मत लगाओ यारों
यह देश बचाओ, दुनियां बचाओ यारों
जहाँ जमाने में आग हीं आग लगी है
यह , आग भी आज भी सगी है
जिसे अपनों ने लगाया है
झुलसते लोग बच्चो को जलाते हैं
जाने कहाँ क्या क्या खाते हैं ?
मानवता को कलंकित करता मानव
जाने कब, इस जमाने में बन गया दानव
ये पुरी दुनियाँ में लगा रहे है आग
रे मानव ! तू मन से तो न भाग
झुलसते लोगों को देखों यारों
और पासा ना फैकों यारो
यह जिन्दगी दुबारा ना मिलेगी
यह बन्दगी दुबारा ना मिलेगी |
अब आग मत लगाओ यारों
यह देश बचाओ, दुनियां बचाओ यारों
रमेश यायावर 23-12-14

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