रोती माँ

मानक

रोती माँ
तुम्हारे आँखों में
सूखे आँसूं भी नही
और तुम माँ हो ,
तुम्हें रोते बिलखते
दुनियाँ ने देखा
अखबारों ने भी देखा
टेलीविजन ने देखा
पर , मैंने नही देखा
मै भी सच कहता हूँ –
मेरे अखबारों ने भी नही देखा |
मै पिता हूँ, माँ
मै क्या , इस सच को क्या देख नही सकता
मेरी आँखे भी ठीक है
मै खुद हीं गूगल हिन्दी से –
टाईप कर कविता लिखता हूँ |
तुम हीं देखो माँ, मैंने झूठ कहा क्या ?
तुमने रोका नही उस आतंकी लाल को
जिसकी पनाहगाह, तुम भी रही
तुम्हारा आंचल भी रहा
तुम्हारे आंचल से खून रिसता है
उसमे उस दूध का, दर्द कहाँ –
जो अन्य विश्व माताओं में है माँ
तुम्हें इंसाफ उस पाक दहलीज पर भी नही मिलेगा माँ
तुम्हारे बच्चे दुनियाँ के बच्चो से अलग भी नही थे
पर , तुम्हीं ने छीना है इनका बचपन, माँ
बच्चो को दुआ देता हूँ माँ, बस तुम्हें छोडकर
बदल देना बस, इनका देश “ परवरदीगर ”
आपका रमेश !

रमेश यायावर 17-12-14

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