जन्म दिन और उसका यथार्थ

मानक

जन्म दिन और उसका यथार्थ
जन्म दिन और उसका यथार्थ आखिर है क्या ! मनुष्य ज्यों ज्यों बड़ा होता है विकसित होता है समझदार होता है उसकी दिली इच्छा होती है यह जानने समझने की उसका जब जन्म हुआ तो धरती का वातावरण किस तरह का था | और कौन सा वह वार था ,वह कौन सी तारीख थी और ग्रह नक्षत्र किस तरह की स्थिति बयान कर रहे थे | आज तो वातावरण बदला हुआ है बच्चे और उसके माता पिता दोनों को हीं पता है उनके यहाँ जन्मोत्सव मनायेगें या फिर मोमबत्ती बुझाकर केक काटकर और दोस्तों मित्रो के दो बोल हेप्पी बर्थ डे तू यु , या फिर मेनी मेनी रिटर्न्स ऑफ़ डे बोल कर यारो दोस्तों के बीच कोई छोटी मोटी पार्टी देकर मना लेते है |
पर मै उन भारतीयों में से हूँ जिनका जन्मदिन क्या है माध्यमिक परीक्षा या बोर्ड परीक्षा के वक्त पता चला मं जन्म दिन फलाना तारीख को हो | मेरे थोड़ी खोजी सोच रही है | मैंने ज्योतिषी तारीखों के माध्यम से किताबी दुनियाँ से ये जाना मेरा जन्म दिन जो वर्तमान में मुझे ज्ञात है वह दिन बुधवार का है जबकि मेरा वास्तविक जन्म दिन सोमवार का है | बर्ष १९६६ का हीं शरद काल का समय है रात्री 10 बजे इतनी जानकारी माँ से मुझे मिली है |
चाहे जन्म समय जो हो इसे मनाने का भी एक सुख होता है जिसप्रकार बिछड़े बच्चे को माँ मिलती है उसी प्रकार यह दिन जिस किसी के भी जिन्दगी में परमात्मा उस दिन उसका दामन खुशीयों से भर दे बाकि ३६४ दिन हंसते रोते कट हीं जाएगें | आज का युवा मन यह नही सोचता उसके जिन्दगी के पुरे एक बरस आज कम हो गए | वह जिस काम के निमित्त आया क्या उसे पाया या उस रास्ते पर चल भी रहा है या नही खैर “ जब जागे तब सबेरा बाकि जीवन भूतों का डेरा ” ! रमेश यायावर

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