आदतों के बटोही

मानक

आदतों के बटोही

आदतों के बटोही

मनुष्य हीं तो हैं

जो चल रहे हैं

चम चमा चम

और कभी

झम झमा झम !

एक नई तो

कई पुरानी

बस एक हीं कहानी

जिसने फिर कोई

लकीर खीचीं

जिसने आकर

जडो को सीचां

उसको फिर

दुनियाँ ने खीचां !

यहाँ कोई शूली पर चढ़ता

और कोई जीवन से

हुआ हलकान

फिर वही जीवन

वही प्राण ….!!

 रमेश यायावर ०9-12-14

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s