भाषा और भाव

मानक

भाषा और भाव

* हरियाणवी भाषा और भावो को समझने और समझाने का मेरा प्रयास है शायद लोग समझगे |

• एक ताऊ दुसरे ताऊ के घर घरेलू विवादों को शांत करने पहुंचा और सारे प्रकरण को सुनकर उसने
अपनी नेक सलाह दी| भाई पडोस में शांति कोणी तो थारा घारह भी कोणी| और पडोस में आग लागगी तो तू के बच्चेगा| तो माहरा के बिगड़ेगा बुजुर्ग ने बताया | देखह कोन्या पाकिस्तान की धमक भारत में भी आवह है| और इसी वक्त तीसरा ताऊ जो ऊँचा सुनह था बीच में टपक्या या कुन सी शांति है जो पेल्या भागी थी वाई है के | फिर ताऊ बोल्या घर में शन्ति नई तो लोकतंत्र खतरा में पड़ेगा फिर वाई राग अलाप म्हारा के म्ह कोई ठेका ले रखा हूँ शांति नह राखन का| तू बैठ के शांति राख टाबर तो समझह कोन्या | तू समझदार है इस प्रकार घरेलू वातावरण नरम गरम् चल रहा था | ऍन वख्त
पुलिस गुमशुदा शांति की तलाश में पहुंची और उसने आधी अधूरी बात सुनकर और फिर बोल्या शांति उड़ भी कोणी उठह भी कोणी चाल थाने घारह शांति आप हीं पहुच जावेगी |
इस प्रकार हरियाणा की भाषा और मिठास को समझना के लिए हर बार की जड़ में जाए और मिनटों में कहानी दोनों बेटियों को मिडिया ने बनाई और बिगड़ी | यह उन दोनों बहनों की बातो से मिडिया को नी लगा वे दोनों सत्य बोलती हैं और पहली बार मार पीट की हो यह तो हो ही नही सकता | पर मिडिया जितना उनको एक दो दिन पहले हीरो बना रहा था उससे तो मुझे लगा और दो चार मर्दों को ये मिडिया वाले मार खिलाकर छोड़ेगे | पर जल्द ही पासा पलटा यह ठीक नही सच क्या है कोण दुनियाँ में अजात शत्रु है |हर गाँव में समाज में परिजन में मतभेद होते है और उसी का परिणाम है कुछ लोग उठ खड़े हुए और मिडिया बदल गया | मिडिया का एक प्रचलित है “बोडी लेंग्वेज” इसको भी इन्होने नही समझा कौन गलत कौन सही |

रमेश यायावर 04-12-14

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