मन की बात

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मन की बात

ट्विटर फेसबुक की कहानी क्या है मुझे आज भी नही मालूम | मै तो इन्हें अपनी पैसेंजर ट्रेन ही मानता हूँ , जो धीरे धीरे मुझे लादकर बस चल रही है और इसके किसी पैसेंजर का मुझे कोई पता नही | मेरी मित्रता ऐसी नही किसी मित्र को बुलाता हूँ नही किसी मित्र के घर जाता हूँ | और मित्र बनाने से मेरा विश्वास टूट सा गया | मेरे सारी कहानी अधूरी हो या फिर पुरी | मैंने प्रकृति के अलावा किसी से सम्बन्ध नही गांठा | दुनिया मुझे पहचाने जाने और सुने इन चीजो से इतर, बस यायावर ! जिसमें वर्ड प्रेस की भूमिका सर्वप्रथम है जिसके माध्यम से आज में इन्टरनेट पर सुबह – सुबह सुलभ रहता हूँ | अपने मन की बात मै भी गत एक बरस से अपने ब्लाक पर लिखता रहा हूँ | यह कुदरती कृपा हीं है अब जीवन के 49 वसंत पर मेरा मर हुआ संत जिन्दा हो चला है | मै अकेला वह इंसान हूँ जो फेसबुक का बहुत कम इस्तेमाल करता हो | मुझे ट्विटर इन दिनों कुछ ज्यादा पसंद है जहाँ मन की बात कम शब्दों में तुरंत लिखी जा सके और यह जाती कहाँ तक यह तो मुझे नही मालूम | पर एक परीक्षण यंत्र अनालेसिस से मै यह जान लेता हूँ 100 -500 -1000 जनों से इसे पढ़ा | और एक खास बात अगर किसी ने असभ्य बात लिखी तो वह दुबारा नही लिखा | जबकि तकरार और आत्महत्या जैसे बात मैंने भी सूनी है | अपनी जिन्दगी अपने तरीके से लोगो को जीना चाहिए और नही हो सके तो मरने के हडबडी आखिर क्यों ? मौत तो ईश्वर का एक पैगाम है उसे अपने तरीके से आने दें |

क्रमशः

रमेश यायावर

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