कविता

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कविता

तुम्हें यहाँ आना अच्छा लगता

देखकर मुस्कुराना अच्छा लगता

कभी शर्माना भी अच्छा लगता

कभी नजरें मिलाना अच्छा लगता |

कभी किताबो में खोयी खोयी

कभी गमो से हंसी, कभी रोयी

मन ने मन के पढ़े हैं जज्बात

धरा का यही प्यार भरा सौगात |

कभी कहानियों ,कविताओ में उतरना

कभी मन की नदी बन संग संग चलना

हवाओ- सी पहारो से यही अठखेली

वर्तमान में हो गयी है, बहुत ही मैली|

ये कई जन्मो के ये होते सम्वाद

अब धरा पर होते नही आबाद

कभी संगीत की तरह हीं बजना

कभी मन मंदिर में उतरकर सजना |

सुनने में भले हीं अच्छा लगता हो

अब हक़ीकत से कोसों हो गया है दूर

प्यार धरा पर सदा हीं होता है चूर चूर ||

रमेश यायावर १२-०७-२०१४

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