रिश्ते

मानक

रिश्ते

आज कहीं नही हूँ

तुम्हारे हमारे बीच,

बस जी रहा हूँ

जिन्दगी के लिये|

रिश्ते नातो में भी

कहीं नही हूँ मै

बस जी रहा हूँ

जिन्दगी के लिये|

उम्मीदों की सरक से

निकलता हूँ बाहर

कहते हो कि,जी रहे हो –

किस जिन्दगी के लिये

मातृत्व सुख रोज

यहाँ मिलता मुझे

बस जी रहा हूँ

जिन्दगी के लिये|

आया हूँ जिस कार्य बस

पूरा करूंगा जब जमी पर

बस जी रहा हूँ –

इसी जिन्दगी के लिये|

रमेश यायावर ०६-०७-२०१४

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