YUVA JOSH

मानक

युवा

इन युवाओ कों क्या हो गया,

क्यों खोलते हे आतंकित स्कूल

मेरे भारत को मिटाने की सोचते हें

वाह रे नसीब के ठोकर

जीवित भारत को मिटाना

संसार के लिये भी असम्भव

और उसे सम्भव बनाने की कोशिश में

अपनी जिन्दगी मिटा ली

इस तरह नसीब को ठोकर मारकर

खिदमतगारों के तलवार बनकर

असत्य अन्याय के रास्ते

मेरे भारत में ऐसे स्कूल खोलना

किसी भी अन्य गुनाह से ज्यादा

बरा गुनाह हे

इन युवाओ की सोच सचमुच रुलाती हे

इस पुण्य धरा को मिटाकर

इन राजनेताओ कों मारकर

क्या धरती खाली हो जायगी?

इन अन्धो के सूर्य, पैसो की रोशनी में

इस तरह नहाने की सोचते हें

हादसे गवाह हें कुछ ना कुछ –

आखिर इन्ही हाथो क्यो होता हे

ये मुल्क के निशान, अपनी ही पहचान

अपने ही हाथो मिटा रहे हे

¼ pquko ckn मेरे भारत में ½ रमेश यायावर .२४-०५-१४

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