samay

मानक

समय

      समय से पहले

समय के बाद

क्या हे यहाँ

क्यो आपाधापी में

वर्तमान का सच

छिपता नजर आता हे

आखिर कैसी हवा हे यहाँ

क्यो बदलता हे मानव?

परिवेश के सच यही तो हें

मानवो ने मानवो से सीखा

संकटो में मानव चीखा

और कुछ मिला तो-

बस फिर……………

ये खेल सदियों चले

आकाँक्षा, ईच्छा और,

प्राप्ती समय पर होगी हीं

यही तो कर्म विधान बोलते

दिन रात अलग अलग

रूपों में बोलते

हम मानवो के गुण धर्म

भूल और प्राश्चित जैसे शब्दों में

गंगाजल का मतलब सिर्फ नदी

पाप क्षय के सामर्थ ने गंगा गंगा

बोलकर भुला दिया अपने पाप कर्मो को

समय के तार और ब्यवहार

आदमी को आदमी संतो कों संत भी –

नही बोलते और शास्त्रों का ज्ञान

नजरो से दूर, हरेक मन में उतरता यही एक सच

पैसा से बंधता क्या कभी यह समय

वर्तमान का पैसा भविष्य का सच

जो जिन्दगी सवांर दे यही तो कहता हे-

रोज रोज मन, अपनी उम्मीदों का सच

समय के साथ ,आज सिर्फ आज मेरा हे हमारा हे

¼ pquko ckn मेरे भारत में ½ रमेश यायावर .२३-०५-१४

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