MOTHER’S DAY -2

मानक

ek¡-2

वक्त ने बदला है, मिजाज कों

माँ ने बदला हे आज कों

हर पीरा कों सुनती रही वो

दर बदर भटकती रही वो

वो ममता की मूर्ती, माँ जो हे

उसके ख्याल ममता कों बचाने में

उसके प्राण वचन निभाने में

आज भी, सरकों की खाक छानते

वह प्यासी भूखी आज भी

ढूढती अपने ही लाल कों

देश मना ले मदर्स डे

या फिर ममता डे

वह वहीं हें अख़बारों के पन्ने पर

कोई मेरे लाल कों बचाओ

कोई तो आगे आओ

हे धरती हे अम्बर

कोई प्यार बरसाओ

यह बंजर भूमि

ये भागती नदियाँ

यें ऊँचे ऊँचे पहार

गगन चूमती इमारतें

मुझे आशियाना दो

मेरा लाल रो रहा हें?

हे धनवानों, में गरीब गरीबी से

मेरे बच्चे अमीरे से मर रहें हें

कोई पूछता नही मुझे

मदर्स डे क्या हे

स्कूलों का सच

या अमीरी की पहचान

आज भी मेरे बच्चे

मुझे क्यों ढूढेगे

में बच्चो कों जो ढूढती हूँ

शायद मदर्स डे पर वें मिलें तो

ममता बिखरूं जुग जुग जियो

मेरे लाल भगवान तुम्हें सलामत रखें

मेने सारा जीवन मांग कर बिताया हे

और इसी तरह मेरा जीवन कट जायगा

जाने वह जीवन कब आएगा

जब तू माँ माँ करता आएगा

इस जीवन की प्रतीक्षा में एक माँ

और उसका उमरता प्यार

सदियों से करता इंतजार

¼ enlZ Ms मेरे भारत में ½ रमेश यायावर .12- 05–2014  

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