Soch Hindi poem

मानक

सोच

आप अमरीकी मै, भारतीय

वह पाकिस्तानी और अन्य

आस्ट्रेलियन , जापान,रसियन

कोरियन, च्यनीज आदि देशो

के नागरिक बनकर केवल अपने-

अपने देशो के, हितो की सोचते हें

इसमे विश्व नागरिक बनकर

हमे उभरना होगा, तभी शांति आयगी

आखिर अशांति बला क्या हे?

एक सोच हीं तो हे ————–

हम अपने अनुकूल विश्व सभ्यता को

चलाना चाहते हें – और टकराव के

मुहाने पर मरने मारने कों तैयार

यह ठीक नही, विनाश इस रचना का

जिसे हमने बनाया नही

आएं एक होकर सोचे क्या यह जरूरी हे

हमारे पीछे कोई चले, आगे क्यो नही

और आगे हम, चलना नही देना चाहते

केवल बातों के भरोसे, अविश्वास के जमीन

यही तो खतरा हे विश्व शांति का

एक सोच कों जिन्दा कर आगे आएँ

विश्व शांति अपनाये————–

                             रमेश यायावर .07- 05-2014       सम्वाद

बहुत कोशिस के बाद पाठकों से हिन्दी में गूगल की मदद से यह हिन्दी लिख़ लिया हूँ ताकि अपनी पूर्ब में लिखी गई बात पाठको तक पहूँचे मुझे हिन्दी में कठिनाई नहीं हे पर तकनीकी कमी की वजह से यह नहीं हो पा रहा था पूर्ब में लिखी गई बाते कों कॉपी कर नये पेज पर पेस्ट कर फिर फॉण्ट हिन्दी कर कोई भी पाठक सारी कविता मेरी कहानी पढ सकता हे ये लगभग 300 होगी पता वही गूगल पर सर्च करे

Yayawarramesh95/wordpress.com       rameshagrawal95/wordpress.com

 

 

 

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